पराधीनता काल के भीषण अत्याचारों से केवल सल्तनकाल का इतिहास ही रक्त रंजित नहीं है, अंग्रेजी काल में भी दर्जनों ऐसी क्रूरतम घटनाएँ इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं जिन्हें पढ़कर आज भी प्रत्येक भारतीय आत्मा रो उठती है । अंग्रेजों ने भी क्रूरता और अत्याचार की सभी मर्यादाएँ तोड़ीं हैं। ऐसी ही एक घटना कानपुर के पास बिठूर की है । अंग्रेजों ने पहले एक तेरह वर्षीय बालिका मैना देवी को कठोरतम यातनाएँ दीं और फिर जिन्दा जलाया । यह बालिका मैना देवी नाना साहब पेशवा की दत्तक पुत्री थी ।
नई दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार उमेश उपाध्याय का रविवार को अकस्मात घर में हुई एक दुर्घटना में निधन हो गया। उनके निधन पर पत्रकारिता जगत में शोक का माहौल है। कल निगम बोध घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार उनके घर पर निर्माण कार्य चल रहा था, जिसमें हुई दुर्घटना में वह घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उनका निधन हो गया।
उनके निधन पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने दुख जताते हुए कहा है कि हम वरिष्ठ पत्रकार उमेश उपाध्याय के असामयिक निधन से स्तब्ध और दुखी हैं। ईश्वर उनके परिवार और मित्रों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। मीडिया जगत के उनके मित्र उन्हें हमेशा याद करेंगे।
उमेश उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग से भी जुड़े रहे हैं। उनके निधन पर अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार, लेखक व हमारे मित्र उमेश उपाध्याय का अकस्मात निधन सभी के लिए अत्यधिक दुखद है। उन्होंने मीडिया जगत में चार दशक से अधिक सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपनी गहरी छाप छोड़ी है। वे सतत हँसमुख रहते हुए कार्यरत रहे।
वरिष्ठ पत्रकार उमेश उपाध्याय का जन्म 1959 में मथुरा में हुआ था। 1980 में पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले उमेश के पास प्रिंट रेडियो टीवी और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में करीब चार दशक का अनुभव रहा है। उन्होंने कई बड़े टीवी चैनलों में विभिन्न पदों पर काम किया है।
