ऋषिकेश उत्तराखंड राज्य के देहरादून जिले में स्थित एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यह उत्तर भारत में हिमालय की तलहटी में स्थित है जिसे ‘गढ़वाल हिमालय के प्रवेश द्वार’ और ‘योग कैपिटल ऑफ़ द वर्ल्ड’ के रूप में जाना जाता है। यह शहर हरिद्वार के उत्तर में लगभग 25 किमी और राजधानी देहरादून से 43 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इसे तीर्थ नगरी के रूप में जाना जाता है और इसे हिंदुओं के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। प्राचीन समय में ऋषियों और मुनियों ने यहां पर ध्यान, योग और प्रार्थना किया था। वर्ष 2015 में तत्कालीन पर्यटन मंत्री ने ऋषिकेश और हरिद्वार को भारत के”जुड़वां राष्ट्रीय विरासत शहरों” की उपाधि दी थी।
लक्ष्मण झूला,
लक्ष्मण झूला गंगा नदी के ऊपर बना एक प्रसिद्ध हैंगिंग ब्रिज है, जो टिहरी गढ़वाल जिले के तपोवन और पौड़ी गढ़वाल जिले के जोंक को जोड़ता है। लक्ष्मण झूला ऋषिकेश शहर के उत्तर-पूर्व में 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पूरा पुल लोहे से बना हुआ है और यह 450 फीट लंबा है और गंगा नदी से 70 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। ऋषिकेश के पर्यटन स्थलों में लक्ष्मण झूला पर्यटकों के बीच बहुत प्रसिद्ध है। माना जाता है कि भगवान राम के छोटे भाई भगवान लक्ष्मण ने इसी स्थान पर गंगा नदी को पार किया था,जहां अब पुल पर्यटकों को देखने के लिए बनाया गया है। लक्ष्मण झूला का निर्माण 1929 में किया गया था। लक्ष्मण झूला के आसपास के महत्वपूर्ण स्थानों में तेरह मंजिला मंदिर, लक्ष्मण मंदिर और राम झूलाआदि शामिल हैं।
त्रिवेणी घाट,
गंगा नदी के तट पर स्थित त्रिवेणी घाट तीन पवित्र नदियों- गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम का स्थान है। इन नदियों को हिंदू धर्म में असाधारण रूप से पवित्र और शुद्ध माना जाता है। मान्यता है कि त्रिवेणी घाट किनारे पवित्र जल में डुबकी लगाने से व्यक्ति का अंतर्मन शुद्ध हो जाता है सभी पापों, चिंताओं और भय से मुक्ति मिल जाती है। त्रिवेणी घाट गंगा नदी के किनारे एक भीड़-भाड़ वाला घाट है, जिसमें तीर्थयात्री चारों ओर स्नान करते हैं। इस घाट पर शाम की आरती के दौरान अद्भुत नजारा देखने को मिलता है जो आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।
वशिष्ठ गुफा
वशिष्ठ गुफा एक प्राचीन गुफा है जहाँ भगवान ब्रह्मा के मानव पुत्र ऋषि वशिष्ठ ने ध्यान किया था। कथाओं के अनुसार ऋषि अपने सभी बच्चों को खोने के बाद बेहद उदास थे और उन्होंने आत्महत्या करने का फैसला किया, लेकिन गंगा नदी ने उन्हें मरने नहीं दिया। इसलिए, उन्होंने गुफा में रहने और ध्यान करने का फैसला किया। गुफा में एक शिवलिंग है और इसे पुरुषोत्तमानंद सोसाइटी द्वारा रखा गया है। इस प्राचीन गुफा को देखने के लिए काफी संख्या में लोग यहां जुटते हैं।
राफ्टिंग
अगर आपको एडवेंचर पसंद है और आप कुछ हटकर आनंद लेना चाहते हैं तो आप ऋषिकेश में राफ्टिंग का लुत्फ उठा सकते हैं। ऋषिकेश में विशेष रूप से राफ्टिंग के लिए भारी संख्या में पर्यटक आते हैं। यहां कुछ सर्टिफाइड ऑपरेटर हैं, जो राफ्टिंग के लिए अच्छी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराते हैं और ऋषिकेश में कैंपिंग और राफ्टिंग के लिए अनुकूलित पैकेज भी है। यदि आप स्ट्रेस फ्री आउटिंग चाहते हैं तो आपके भोजन, पानी और राफ्टिंग की व्यवस्था संचालकों द्वारा की जाती है। यदि आप स्वंय व्यवस्था करना चाहते हैं तो उसका भी विकल्प मौजूद है।
स्वर्ग आश्रम
“स्वर्ग आश्रम” को स्वामी विशुद्धानंद की याद में बनवाया गया था। यह एक आध्यात्मिक आश्रम है, जिसे काली कमली वाला के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि वे हमेशा काले रंग का कम्बल पहने रहते थे। राम झूला और लक्ष्मण झूला के बीच स्थित, भारत का यह सबसे पुराना आश्रम है और ऋषिकेश के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में से एक है। इस आश्रम से सूर्यास्त का नजारा देखने के लिए पर्यटक जुटते हैं। यहां योग और ध्यान करने के लिए 300 रुपये का शुल्क लगता है।
नीलकंठ महादेव मंदिर
नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश शहर से 12 किमी दूर स्थित है। यह मंदिर सिल्वन वन के बीच 1670 मीटर में स्थित है।यह भारत के सबसे पवित्र शिव मंदिरों में से एक है और ऋषिकेश में देखने के लिए सबसे अच्छे धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर समुद्रमंथन की गाथा को दर्शाता है। मंदिर में एक ताजे पानी का झरना भी है जिसमें भक्त स्नान करके मंदिर में पूजा करने जाते हैं।
बंगी जम्पिंग
वास्तव में ऋषिकेश को एडवेंचर का स्वर्ग माना जाता है। खतरों से खेलने का शौक रखने वालों के बीच यहां का बंगी जम्पिंग सबसे अधिक लोकप्रिय है। जम्पिंग हाइट्स की टीम बंजी जम्पिंग, फ्लाइंग फॉक्स और विशाल झूलों जैसे विभिन्न एडवेंचरस विकल्प देती है। आपको यहां पूरी सुरक्षा मुहैया करायी जाती है और बंगी जम्पिंग करने के लिए बस हिम्मत की जरूरत होती है। लेकिन इसका एक अलग ही आनंद होता है।
बीटल्स आश्रम
प्रारंभ में इस आश्रम को महर्षि महेश योगी आश्रम के नाम से जाना जाता था। 1968 में बीटल्स द्वारा आश्रम का दौरा करने के बाद इस आश्रम का नाम बीटल्स रखा गया। यह आश्रम अब राजाजी नेशनल पार्क में स्थित एक ईको-फ्रेंडली पर्यटक आकर्षण है और गंगा नदी के निकट स्थित एक शांत वातावरण प्रदान करता है। यहां के शांत वातारवरण में बैठकर लोग मेडिटेशन करते है। इसके अलावा प्रकृति की सैर, ट्रेकिंग और बर्ड वॉचिंग सेशन भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है
ऋषि कुंड
“ऋषि कुंड” एक प्राकृतिक गर्म पानी का तालाब है जिसे शहर में एक पवित्र जल निकाय माना जाता है। मान्यता है कि यमुना नदी के आशीर्वाद के बाद एक ऋषि ने इस तालाब को पानी से भरा था। स्थानीय लोगों का यह भी मानना है कि भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान कुंड में स्नान किया था और इस स्थान पर गंगा और यमुना एक दूसरे से मिलती हैं।
