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एसकेएम 26 नवंबर को राष्ट्रव्यापी राजभवन मार्च का करेगा आयोजन

Date : 18-Nov-2022

दिल्ली, 17 नवंबर (हि.स.)। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा कि 26 नवंबर को देश के सभी राज्यों में किसान “राजभवन मार्च” आयोजित करेंगे।

इस दौरान संबंधित राज्यपालों के माध्यम से “भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन” सौंपा जाएगा। प्रेसवार्ता के दौरान मोर्चे ने इस मार्च में अधिक से अधिक किसानों को शामिल होने के लिए अनुरोध किया।

मोर्चे ने कहा कि संबंधित राज्यों की प्रमुख स्थानीय मांगों के साथ सभी फसलों के लिए कानूनी रूप से गारंटीकृत सीटू प्लस 50 फीसदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), एक व्यापक ऋण माफी योजना के माध्यम से कर्ज मुक्ति, बिजली संशोधन विधेयक, 2022 को वापस लेना, लखीमपुर खीरी में किसानों व पत्रकारों के नरसंहार के आरोपी केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी एवं उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई, प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की फसल बर्बाद होने पर शीघ्र क्षतिपूर्ति के लिए व्यापक एवं प्रभावी फसल बीमा योजना, सभी मध्यम, छोटे और सीमांत किसानों और कृषि श्रमिकों को प्रति माह 5,000 रुपये की किसान पेंशन, किसान आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज सभी झूठे मामलों को वापस लेना, किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए सभी किसानों के परिवारों को मुआवजे का भुगतान शामिल है।

मोर्चे ने कहा कि 19 नवंबर को पूरे देश में फ़तह दिवस मनाया जाएगा। यह याद करने योग्य है कि मोदी सरकार को 19 नवंबर 2021 को तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मुख्य मांग के आगे घुटने टेकने पड़े थे। किसानों द्वारा निरंतर विरोध प्रदर्शन के बाद, सरकार ने 09 दिसंबर 2021 को एसकेएम से उचित प्रतिनिधित्व के साथ एमएसपी कानून पर एक समिति गठित करने और अन्य मांगों पर एक लिखित आश्वासन भी दिया। इसी आश्वासन के आधार पर किसान 11 दिसंबर 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर अपने ऐतिहासिक आंदोलन, जिसमें 700 से अधिक किसान शहीद हुए, को स्थगित करते हुए घर लौटे।

मोर्चे ने कहा कि एक दिसंबर से 11 दिसंबर तक सभी राजनीतिक दलों के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों और सभी राज्य विधानसभाओं के नेताओं और विधायकों के कार्यालयों तक मार्च निकाला जाएगा। उन सभी को “कॉल-टू-एक्शन” पत्र प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें मांग की जाएगी कि वे किसानों की मांगों के मुद्दे को संसद/विधानसभाओं में उठाएं और इन मुद्दों पर बहस और समाधान के लिए दबाव बनाएं।

हिन्दुस्थान समाचार/आशुतोष


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