थेपला एक पारंपरिक गुजराती व्यंजन है, जिसे अब भारत के अलग-अलग हिस्सों में लोग बड़े चाव से खाने लगे हैं। यह न सिर्फ नाश्ते के रूप में लोकप्रिय है, बल्कि ट्रैवल स्नैक और हल्के लंच के विकल्प के तौर पर भी काफी पसंद किया जाता है। लंबे सफर के दौरान यह डिश आसानी से खराब नहीं होती, इसी वजह से यह यात्रियों की पहली पसंद बन चुकी है। मुख्य रूप से थेपला गेहूं के आटे और बेसन को मिलाकर तैयार किया जाता है। कुछ जगहों पर इसमें बाजरा या ज्वार का आटा भी मिलाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और पौष्टिकता दोनों बढ़ जाते हैं।
पारंपरिक रूप से Methi Thepla सबसे ज्यादा लोकप्रिय माना जाता है, जिसमें ताजी मेथी की पत्तियों को आटे में मिलाकर रोटी जैसा पराठा तैयार किया जाता है। हाल के समय में थेपला की कई वैरायटी सामने आई हैं, जिनमें अलग-अलग फ्लेवर और ट्विस्ट जोड़े जा रहे हैं। इसी क्रम में अब लसूनी थेपला यानी गार्लिक फ्लेवर वाला थेपला भी लोगों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है। इसका स्वाद तीखा और सुगंधित होता है, जो इसे आम मेथी थेपला से अलग बनाता है। लसूनी थेपला बनाने के लिए सबसे पहले गेहूं के आटे में बेसन मिलाया जाता है। इसमें बारीक कटा या कद्दूकस किया हुआ लहसुन, हरी मिर्च, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, नमक और थोड़ा सा तेल डाला जाता है।
सभी सामग्री को अच्छे से मिलाकर नरम आटा गूंथा जाता है। कुछ लोग इसमें दही मिलाकर भी आटा तैयार करते हैं, जिससे थेपला और भी नरम और स्वादिष्ट बनता है। इसके बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर बेल लिया जाता है और तवे पर हल्का तेल लगाकर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेक लिया जाता है। तैयार होने के बाद इसे दही, अचार या चाय के साथ परोसा जा सकता है। यह डिश झटपट बन जाती है और खाने में बेहद स्वादिष्ट लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार थेपला जैसी पारंपरिक डिश न केवल स्वाद में अच्छी होती है, बल्कि यह सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद होती है क्योंकि इसमें अनाज और मसालों का संतुलित उपयोग होता है।
कुल मिलाकर, Methi Thepla की तरह लसूनी थेपला भी एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है, जो अब पारंपरिक स्वाद के साथ नए फ्लेवर का आनंद भी दे रहा है। यह रेसिपी घर पर आसानी से बनाई जा सकती है और हर उम्र के लोगों को पसंद आती है।
