अभियंता दिवस: राष्ट्र निर्माण के शिल्पी सर विश्वेश्वरैया का गौरवगान | The Voice TV

Quote :

“स्वयं जैसे हो वैसे ही रहो; बाकी सब तो पहले से ही कोई और बन चुके हैं।” ― ऑस्कर वाइल्ड

Editor's Choice

अभियंता दिवस: राष्ट्र निर्माण के शिल्पी सर विश्वेश्वरैया का गौरवगान

Date : 14-Apr-2026

 सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया, जिन्हें संपूर्ण भारत 'आधुनिक भारत के विश्वकर्मा' और 'राष्ट्र निर्माण के महान अभियंता' के रूप में जानता है, भारतीय मेधा, अटूट परिश्रम और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का एक जीवंत और अद्वितीय उदाहरण हैं। उनकी जयंती, जो प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को आती है, पूरे देश में 'अभियंता दिवस' (Engineers' Day) के रूप में अत्यंत गौरव और सम्मान के साथ मनाई जाती है। उनका जीवन एक साधारण बालक से लेकर एक विश्वप्रसिद्ध इंजीनियर और मैसूर के 'दीवान' बनने तक की एक ऐसी प्रेरणादायी गाथा है, जो हमें यह सिखाती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और लक्ष्य स्पष्ट, तो तकनीकी कौशल और अनुशासन के बल पर किसी भी राष्ट्र की नियति को बदला जा सकता है। मैसूर के एक छोटे से गाँव मुदेनाहल्ली से निकलकर सफलता के सर्वोच्च शिखर तक पहुँचने की उनकी यह यात्रा साहस, बुद्धिमत्ता और निस्वार्थ सेवा की एक अद्भुत मिसाल है।


विश्वेश्वरैया जी का संपूर्ण व्यक्तित्व 'कर्म ही पूजा है' (Work is Worship) के महान सिद्धांत पर आधारित था। उनके जीवन में अनुशासन और समय की पाबंदी का स्थान सर्वोपरि था। उनके बारे में यह प्रसिद्ध है कि वे समय के इतने सटीक और पाबंद थे कि लोग उनकी उपस्थिति और उनके कार्यों को देखकर अपनी घड़ियाँ मिलाया करते थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक सहायक इंजीनियर के रूप में की थी, लेकिन अपनी विलक्षण प्रतिभा के कारण उन्होंने सिंचाई और जल प्रबंधन के क्षेत्र में ऐसे क्रांतिकारी कार्य किए, जिनकी कल्पना उस समय कठिन थी। उन्होंने मैसूर में प्रसिद्ध 'कृष्णराज सागर बांध' का निर्माण कराया, जिसने न केवल कावेरी नदी के जल का उचित प्रबंधन किया, बल्कि हजारों एकड़ सूखी और बंजर भूमि को हरा-भरा कर खेती के योग्य बना दिया। उनकी इस उपलब्धि ने दक्षिण भारत की आर्थिक स्थिति को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनकी तकनीकी विशेषज्ञता केवल भारत तक सीमित नहीं थी। 'ऑटोमैटिक फ्लडगेट्स' (स्वचालित बाढ़ द्वार) और 'ब्लॉक सिस्टम' जैसी उनकी क्रांतिकारी खोजों ने जल संरक्षण और सिंचाई के क्षेत्र में भारत को विश्व स्तर पर एक नई पहचान दिलाई। मूसी नदी की बाढ़ से हैदराबाद शहर को बचाने के लिए उन्होंने जो ड्रेनेज सिस्टम और सुरक्षा योजना तैयार की, वह आज भी इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना मानी जाती है। विश्वेश्वरैया जी का विजन केवल भौतिक निर्माण या बांधों तक सीमित नहीं था; वे एक दूरदर्शी समाज सुधारक और शिक्षाविद् भी थे। उनका मानना था कि भारत को गरीबी और अभावों से मुक्त करने का एकमात्र मार्ग 'औद्योगीकरण' और 'तकनीकी शिक्षा' है। उन्होंने मैसूर बैंक, मैसूर विश्वविद्यालय और कई महत्वपूर्ण उद्योगों की स्थापना में बुनियादी भूमिका निभाई, जिससे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के नए द्वार खुले।

सर एम. विश्वेश्वरैया जी का जीवन दर्शन अत्यंत सरल किंतु प्रभावशाली था। वे मानते थे कि किसी भी कार्य को उसकी पूर्णता और शुद्धता के साथ करना ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। उनके भीतर राष्ट्र के प्रति इतनी गहरी निष्ठा थी कि उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद भी देश के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में बिना किसी पारिश्रमिक के अपनी सेवाएं दीं। उन्हें भारत सरकार द्वारा देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से अलंकृत किया गया, जो उनके प्रति कृतज्ञ राष्ट्र की एक छोटी सी भेंट थी। उनकी सादगी का आलम यह था कि वे हमेशा खादी के स्वच्छ वस्त्र पहनते थे और अपने व्यक्तिगत और सरकारी कार्यों के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचकर रखते थे। उनकी ईमानदारी और नैतिकता की कहानियाँ आज भी प्रशासनिक अधिकारियों और इंजीनियरों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

आज के इस डिजिटल और तीव्र गति से बदलते युग में, जहाँ तकनीक हर क्षण बदल रही है, विश्वेश्वरैया जी के विचार और उनकी कार्यशैली और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। वे केवल मशीनों के इंजीनियर नहीं थे, बल्कि वे समाज की समस्याओं को तकनीक से सुलझाने वाले 'सोशल इंजीनियर' थे। उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि वास्तविक प्रगति वही है जो आम आदमी के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए और उसे आत्मनिर्भर बनाए। उनके द्वारा दिया गया संदेश "कुशलता से किया गया कार्य ही राष्ट्र की सबसे बड़ी सेवा है" आज के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक मंत्र की तरह है।

अत: सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया जी का व्यक्तित्व और कृतित्व हमें यह सिखाता है कि ईमानदारी, तकनीकी उत्कृष्टता और राष्ट्र प्रेम के समन्वय से ही हम एक समर्थ, समृद्ध और विकसित भारत का सपना साकार कर सकते हैं। वे एक ऐसे महान पुरुष थे जिन्होंने अपनी कलम और कैलकुलेटर से भारत के भविष्य की सुंदर रेखाएं खींचीं। उनकी जयंती हमें आत्म-चिंतन करने और अपने कार्यों के प्रति पुनः समर्पित होने की प्रेरणा देती है, ताकि हम भी उनके पदचिह्नों पर चलते हुए देश की प्रगति में अपना सार्थक योगदान दे सकें।

RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement