आगरा, 17 मई प्रेस क्लब ऑफ आगरा और उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन की ओर से बुधवार को आयोजित इंडो-नेपाल-बंगलादेश मीडिया कॉन्क्लेव-2023 में केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल और उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगन्द्र उपाध्याय शामिल हुए।
होटल क्लार्क शिराज में आयोजित इस सम्मेलन में भारत, नेपाल और बंगलादेश से 70 से अधिक पत्रकार शामिल हुए। कॉन्क्लेव का विषय था सामयिक परिदृश्य में मीडिया की चुनौतियां और समाधान। वहीं इस कार्यक्रम को उप्र के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने वीडिया कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया।
केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि प्रतिस्पर्धा और टीआरपी के चक्कर में कुछ समाचार आधे-अधूरे या तथ्यहीन प्रसारित और प्रकाशित कर दिए जाते हैं। इससे समाज पर उसका गलत असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गलत पत्रकारिता के लिए पहले पीत पत्रकारिता शब्द का उपयोग किया जाता था, उसी प्रकार प्रशासनिक अधिकारियों के भ्रष्टाचार को लालफीताशाही शब्द दिया गया। लेकिन अब समय है कि इन सबसे बचाव कर अपने छवि को स्वच्छ बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि चेहरे पर से धूल तो हटाएं, लेकिन दर्पण में लगी धूल से भ्रमित न हों। उन्होंने तुलसीदास के दोहे को वर्तमान युग के परिप्रेक्ष्य में संशोधित करते हुए कहा कि कवि, वैद्य और पत्रकार यदि भयवश प्रशंसा करता है तो देश का नाश होता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र के चार खंभों में से यदि एक भी कमजोर होगा तो लोकतंत्र खतरे में आ जाएगा। इसलिए पत्रकार पारदर्शिता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करे। किसी भी हालत में लक्ष्मण रेखा पार न करें। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि नारद जी की तरह ही पत्रकार भी सूचना तो देते ही हैं, पीड़ितजनों को न्याय भी दिलवाते हैं। नेपाल के पत्रकारों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि नेपाल देश नहीं, हमारा छोटा भाई है। भाषा, संस्कृति, सभ्यता सभी कुछ नेपाल से हमारा मिलता है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि पत्रकारिता प्रजातंत्र का चौथा स्तंभ है। सत्ता और पत्रकारिता के प्रतिष्ठितजनों को मिल कर दोनों के बीच की दूरी खत्म करके प्रजातंत्र को मजबूत करना होगा। तभी देश और प्रदेश की प्रगति संभव है।
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि सत्ता और पत्रकार जब समाज के लिए सोचते हैं, तभी समाधान निकलता है। पत्रकार ही जनता को जागरूक करते हैं। पत्रकारिता की जागरूकता का असर हमने आपातकाल में देखा था। जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई थी तब समाचार पत्रों ने भी आवाज बुलंद करके उसका विरोध किया था। परिणाम स्वरूप तत्कालीन सत्ता को सिमटना पड़ा था। पत्रकार यदि अच्छे मन से काम करें तो वे ही समाज, प्रदेश और देश में परिवर्तन ला सकते हैं।
अमर उजाला, नई दिल्ली के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री, उपजा के प्रदेश अध्यक्ष शिव मनोहर पांडे ने पत्रकारिता पर अपना पक्ष रखा। सार्क जर्नलिस्ट फोरम, काठमांडू-नेपाल के अध्यक्ष राजू लामा ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जो प्रजातंत्र की जननी है। नेपाल और बांग्लादेश में भी प्रजातंत्र भारत से ही आया है। भारत की पत्रकारिता से भी विश्व के कई देश प्रभावित हैं। प्रेरणा लेते हैं, इससे हमें शिक्षा लेनी चाहिए। साउथ एशिया के पत्रकारों को चितंन करना चाहिए। अफगानिस्तान में पत्रकारों को काफी संकट का सामना करना पड़ सकता है। वहां आज भी टीवी पर महिला पत्रकार बुर्के में खबरे पढ़ती हैं। जबकि भारत में पत्रकारों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमेशा अग्रिम पंक्ति में आकर लड़ाई लड़ी है।
बांग्लादेश से आए अब्दुल रहमान ने कहा कि यह आयोजन गौरवशाली रहा है। भारत का प्रजातंत्र भी समृद्धशाली और प्रेरक है, मैं इसे सैल्यूट करता हूं। वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार त्रिपाठी ने पत्रकार और पत्रकारिता के संकट पर विशेष चिंतन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि हर तरह के समाचार भी चाहिए और सुरक्षा भी नहीं मिलेगी, अतः नैतिकता ही पत्रकार का कवच है। उसी को अपनाएं। प्रेस क्लब ऑफ आगरा के सचिव संजय तिवारी, कोषाध्यक्ष विवेक जैन ने भी अपने विचार रखे। समारोह में अतिथियों के अतिरिक्त वरिष्ठ पत्रकारों का भी सम्मान किया गया।