बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने प्रो. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा सेना को मजिस्ट्रेटी अधिकार देने के हालिया फैसले पर चिंता व्यक्त की है। बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि इससे नई समस्याएं पैदा होने की संभावना है।
उन्होंने अंतरिम सरकार से देश भर में सैन्य मजिस्ट्रेट को शक्तियां देने पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया, क्योंकि यह कदम अन्य संस्थाओं की अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में विफलता को दर्शाता है।
बीएनपी नेता ने कहा, "सेना को मजिस्ट्रेटी शक्तियां दी गई हैं। यह चिंताजनक घटनाक्रम है, क्योंकि यह कानून और व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। इससे यह भी पता चलता है कि अन्य संस्थाएं भी ठीक से काम नहीं कर रही हैं।"
यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (यूएनबी) की रिपोर्ट के अनुसार, फखरुल ने कहा कि उनका मानना है कि सेना को केवल उन क्षेत्रों में मजिस्ट्रेटी शक्तियां दी जानी चाहिए जो नियंत्रण से बाहर हो गए हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण क्षेत्रों में जहां राजनीतिक नेता स्थिति को संभाल रहे हैं, सेना को मजिस्ट्रेटी शक्तियां देना उचित नहीं होगा और इससे नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। "यह एक विवेकपूर्ण कदम नहीं होगा।"
इससे पहले मंगलवार को प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए देशभर में बांग्लादेश सेना के कमीशन प्राप्त अधिकारियों को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्ति प्रदान की है। पात्र सेना अधिकारी अगले 60 दिनों तक देशभर में जिला मजिस्ट्रेटों की निगरानी में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य कर सकेंगे।
बीएनपी महासचिव ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अंतरिम सरकार सभी बाधाओं को दूर करेगी और निष्पक्ष एवं समावेशी लोकतांत्रिक चुनाव के लिए अनुकूल माहौल तैयार करेगी।