भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सोमवार को जानकारी दी कि वह 24 दिसंबर को 6.5 टन वजनी BlueBird Block-2 संचार उपग्रह को लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस सैटेलाइट को BlueBird-6 के नाम से भी जाना जाता है।
यह लॉन्च आंध्र प्रदेश स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा। भारत के सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 के जरिए इस उपग्रह को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया जाएगा। यह BlueBird कम्युनिकेशन सैटेलाइट अमेरिका की कंपनी AST SpaceMobile द्वारा विकसित किया गया है।
ISRO के अनुसार, BlueBird-6 दुनिया के सबसे भारी वाणिज्यिक उपग्रहों में से एक है, जिसका वजन लगभग 6.5 टन है। यह उपग्रह 19 अक्टूबर को अमेरिका से भारत पहुंचा था और तब से इसके लॉन्च की तैयारियां चल रही थीं।
ISRO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा,
“#LVM3M6 — ISRO का भरोसेमंद हेवी-लिफ्ट लॉन्च वाहन, BlueBird Block-2 को लो अर्थ ऑर्बिट तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
इससे पहले AST SpaceMobile ने बताया था कि लॉन्च के बाद यह सैटेलाइट लो अर्थ ऑर्बिट में अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल फेज्ड-ऐरे सिस्टम होगा, जिसका आकार करीब 2,400 वर्ग फीट होगा। यह BlueBird-1 से BlueBird-5 की तुलना में लगभग 3.5 गुना बड़ा होगा और करीब 10 गुना अधिक डेटा क्षमता प्रदान करेगा।
यह मिशन ISRO और अमेरिका के बीच दूसरा बड़ा अंतरिक्ष सहयोग है। इससे पहले जुलाई में ISRO ने NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था, जिसकी लागत करीब 1.5 अरब डॉलर है। यह मिशन कोहरे, घने बादलों और बर्फ की परतों के पार भी उच्च-रिजॉल्यूशन पृथ्वी अवलोकन करने में सक्षम है।
AST SpaceMobile सितंबर 2024 में BlueBird-1 से BlueBird-5 तक पांच उपग्रह पहले ही लॉन्च कर चुकी है। नेटवर्क के विस्तार के लिए कंपनी ने दुनिया भर के 50 से अधिक मोबाइल ऑपरेटर्स के साथ साझेदारी की है।
ISRO ने बताया कि BlueBird-6 के व्यावसायिक प्रबंधन की जिम्मेदारी उसकी कमर्शियल शाखा New Space India Limited (NSIL) के पास है।
ISRO द्वारा विकसित LVM3 एक तीन-चरणीय लॉन्च वाहन है, जिसमें दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर्स (S200), एक लिक्विड कोर स्टेज (L110) और एक क्रायोजेनिक अपर स्टेज (C25) शामिल हैं। इस रॉकेट का लिफ्ट-ऑफ मास 640 टन है और इसकी ऊंचाई 43.5 मीटर है। यह 4,200 किलोग्राम तक का पेलोड जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में ले जाने में सक्षम है।
हाल ही में 2 नवंबर को LVM3 ने भारत के अब तक के सबसे भारी CMS-3 सैटेलाइट (4.4 टन) को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया था। इससे पहले यह रॉकेट चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और OneWeb के दो मिशनों में कुल 72 उपग्रहों को भी लॉन्च कर चुका है।
