बेंगलुरु: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं (NAL) में भारत के स्वदेशी हंसा-3 एनजी पायलट ट्रेनर विमान का उत्पादन संस्करण लॉन्च किया। उन्होंने 19-सीटर हल्के परिवहन विमान सारस एमके-2 की प्रगति की समीक्षा की और भारत के नागरिक एवं रक्षा विमानन पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने के लिए कई एयरोस्पेस सुविधाओं का उद्घाटन किया।
हंसा-3 एनजी भारत का पहला पूर्णतः मिश्रित दो-सीट वाला प्रशिक्षण विमान है, जिसे अगले दो दशकों में बढ़ती पायलट मांग (लगभग 30,000 पायलट) को पूरा करने के लिए विकसित किया गया है। आंध्र प्रदेश के कुप्पम में ₹150 करोड़ की लागत वाला पायलट ट्रेनर विमान का विनिर्माण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिसकी वार्षिक क्षमता 100 विमान है।
सारस एमके-2 में दबावयुक्त केबिन, डिजिटल एवियोनिक्स, ग्लास कॉकपिट और हल्के वजन के अनुकूलन विकल्प शामिल हैं। यह विमान क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने और विदेशी छोटे यात्री विमानों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा। इसके परीक्षण के लिए मंत्री ने आयरन बर्ड सुविधा का भी उद्घाटन किया, जो पूर्ण-प्रणाली एकीकरण और भू-परीक्षण मंच है।
साथ ही सिंह ने उच्च-ऊँचाई वाले प्लेटफॉर्म (HAPs) का उद्घाटन किया – सौर ऊर्जा से चलने वाले मानवरहित विमान, जो 20 किलोमीटर से अधिक ऊँचाई तक उड़ान भर सकते हैं। HAPs का उद्देश्य निगरानी, संचार और पर्यावरण निगरानी में सहायता करना है।
मंत्री ने NAviMet विमानन मौसम प्रणाली का भी शुभारंभ किया, जो 175 से अधिक दृष्टि और AWOS प्रणालियों के साथ वर्तमान में नागरिक और रक्षा हवाई अड्डों पर कार्यरत है।
इस अवसर पर सीएसआईआर-एनएएल और सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने 150 किलोग्राम वर्ग के लोइटरिंग मिशन UAV के विकास में साझेदारी की औपचारिक घोषणा की। यह यूएवी 900 किलोमीटर की रेंज और 6-9 घंटे की उड़ान क्षमता के साथ एआई-सहायता प्राप्त लक्ष्य पहचान में सक्षम होगा।
सिंह ने कहा कि ये सभी परियोजनाएँ स्वदेशी विमानन निर्माण को मज़बूत करने, विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम करने और 2035 तक भारत को विमानन केंद्र बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।
