बेंगलुरु स्थित एक सरकारी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने पर्यावरण-अनुकूल जिंक-आयन बैटरियों के लिए नया कैथोड पदार्थ विकसित किया है, जिससे ऊर्जा भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो सकेगी। यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने शुक्रवार को दी।
वैज्ञानिकों ने आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले बैटरी पदार्थ वेनेडियम ऑक्साइड (V2O5) में “थर्मो-इलेक्ट्रोकेमिकल सक्रियण प्रक्रिया” के माध्यम से संरचनात्मक बदलाव किए। इस तकनीक से तैयार नया पदार्थ जिंक-वेनेडियम ऑक्साइड (Zn-V2O5) बैटरी में जिंक आयनों की आवाजाही तेज़ करता है, संरचनात्मक स्थिरता बढ़ाता है और अधिक ऊर्जा संग्रहीत करने में सक्षम बनाता है।
मंत्रालय के अनुसार, इस नई संरचना वाली जिंक-आयन बैटरियां पारंपरिक कैथोड की तुलना में अधिक ऊर्जा संग्रहित कर सकती हैं और हजारों चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों के बाद भी प्रदर्शन में गिरावट नहीं आती।
पिछले कुछ दशकों में उच्च ऊर्जा घनत्व के कारण लिथियम-आयन बैटरियों पर अनुसंधान केंद्रित रहा है, लेकिन पर्यावरणीय जोखिम, सुरक्षा और लागत की चुनौतियों के कारण वैकल्पिक बैटरी तकनीकों पर ध्यान बढ़ा है। ऐसे में पानी-आधारित जिंक-आयन बैटरियां सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में उभर रही हैं।
यह शोध डॉ. अशुतोष कुमार सिंह के नेतृत्व में सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज़ (CeNS) में किया गया, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान है।
मंत्रालय ने कहा कि यह तकनीक प्रचलित कैथोड सामग्री की क्षमता बढ़ाने का सरल और प्रभावी तरीका प्रदान करती है और ऊर्जा भंडारण समाधानों के विकास में महत्वपूर्ण कदम है।
