जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक तरफ तकनीकी विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग से डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर समस्याएं खड़ी हो रही हैं। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब साइबर अपराधी AI टूल्स का इस्तेमाल करके पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ और शातिर तरीके से हमले कर रहे हैं।
अब केवल किसी ईमेल या कैलेंडर लिंक पर क्लिक करना भी आपके निजी डेटा को खतरे में डाल सकता है—और आपको इसका आभास तक नहीं होगा।
AI टूल्स क्यों बन रहे हैं खतरे का कारण?
दुनियाभर में टेक कंपनियां तेज़ी से AI-संचालित टूल्स और प्लेटफॉर्म्स तैयार कर रही हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इनका निर्माण बिना पूरी सुरक्षा जांच के किया जा रहा है, जिससे नई तरह की कमजोरियां सामने आ रही हैं।
AI की मदद से कोडिंग करने का चलन बढ़ा है, लेकिन रिसर्च से यह भी साफ हुआ है कि AI भी मानव जैसी गलतियां कर सकता है। ऐसे में, जब कोड में सुरक्षा खामियां रह जाती हैं, तो साइबर अपराधी उनका आसानी से फायदा उठा लेते हैं।
AI से संचालित हो रहे साइबर अटैक
अब AI केवल सहायक नहीं, बल्कि पूरे हमले की योजना बनाने, उसे अंजाम देने और नियंत्रित करने में सक्षम हो चुका है।
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अगस्त 2025 में, एक बड़ी सप्लाई-चेन हैकिंग में AI का इस्तेमाल कर हैकर्स ने Nx नामक प्लेटफॉर्म पर एक फर्जी सॉफ्टवेयर अपलोड किया। इसे सैकड़ों यूज़र्स ने भरोसे से डाउनलोड किया, जिससे उनका संवेदनशील डेटा—जैसे पासवर्ड और क्रिप्टो वॉलेट की जानकारी—चोरी होने की कगार पर पहुंच गई।
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एक अन्य घटना में, Anthropic नामक अमेरिकी कंपनी ने एक ऐसे रैंसमवेयर अभियान की पहचान की जो पूरी तरह ऑटोमेटेड AI पर आधारित था। यह सिस्टम खुद सुरक्षा खामी तलाशता, उस पर हमला करता और फिर यूज़र्स से फिरौती की मांग करता था।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस तरह के हमलों के लिए अब किसी तकनीकी विशेषज्ञ की भी जरूरत नहीं रह गई है—AI खुद ही पूरा प्रोसेस संभाल रहा है।
साइबर सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
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AI टूल्स का निर्माण करते समय सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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कोई भी नया सॉफ्टवेयर या फीचर लॉन्च करने से पहले गहराई से सिक्योरिटी ऑडिट किया जाए।
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आम यूज़र्स को फिशिंग लिंक, संदिग्ध अटैचमेंट और अनजान ईमेल्स से बचने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।
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डिजिटल साक्षरता और साइबर अवेयरनेस को बढ़ावा देना अब अनिवार्य हो गया है।
अगर जनरेटिव AI का प्रयोग सोच-समझकर और नियंत्रण में किया जाए, तो यह तकनीक का वरदान साबित हो सकती है। लेकिन इसके गलत हाथों में जाने से यह डिजिटल दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती भी बन सकता है।
