भारत सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की गुणवत्ता को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। 31 दिसंबर 2025 तक देशभर में 50,373 सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत प्रमाणित किया जा चुका है। यह गुणवत्ता ढांचा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य सुरक्षित, प्रभावी और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है।
NQAS की शुरुआत वर्ष 2015 में केवल 10 जिला अस्पतालों से हुई थी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से उप-जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों तक विस्तारित किया गया। वर्तमान में प्रमाणित संस्थानों में 48,663 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (SHC, PHC, UPHC) और 1,710 द्वितीयक स्वास्थ्य संस्थान (CHC, SDH, DH) शामिल हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गुणवत्ता को सभी स्तरों पर संस्थागत रूप दिया गया है।
वर्चुअल असेसमेंट की शुरुआत से NQAS प्रमाणन में तेज़ी आई है। दिसंबर 2023 में जहां 6,506 संस्थान प्रमाणित थे, वहीं दिसंबर 2024 तक यह संख्या बढ़कर 22,786 हो गई और दिसंबर 2025 में 50,000 का आंकड़ा पार कर लिया गया। यह वृद्धि क्षमता निर्माण, डिजिटल नवाचार, मूल्यांकनकर्ताओं की संख्या बढ़ाने और निरंतर गुणवत्ता सुधार प्रयासों का परिणाम है।
यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने मार्च 2026 तक कम से कम 50% सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को NQAS प्रमाणित करने का लक्ष्य रखा है, जिससे देश में गरीब, वंचित और दूरदराज़ क्षेत्रों की आबादी को भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
50,000 से अधिक NQAS प्रमाणन भारत की एक मजबूत, आत्मनिर्भर और गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” की भावना को साकार करता है।
