एम्स भुवनेश्वर ने अपना पहला लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो संस्थान के लिए एक बड़ी चिकित्सा उपलब्धि मानी जा रही है। एम्स भुवनेश्वर के कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. आशुतोष बिस्वास ने बताया कि इस सर्जरी के बाद डोनर को बिना किसी जटिलता के अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि मरीज की हालत तेजी से सुधर रही है और उसे भी जल्द डिस्चार्ज किया जाएगा।
डॉ. बिस्वास ने बताया कि यह ऑपरेशन 20 दिसंबर को लिवर फेलियर से पीड़ित एक मरीज पर किया गया था। सर्जरी के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक बड़ी टीम ने रातभर मरीज की कड़ी निगरानी की। 11 दिन बाद डोनर और मरीज दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है। मरीज ओडिशा के पुरी जिले के पिपिली का 37 वर्षीय व्यक्ति है।
डोनर मरीज का 30 वर्षीय भाई है, जिसने बिना किसी आर्थिक लाभ के अपने भाई की जान बचाने के लिए अपने लिवर का एक हिस्सा दान किया। 50 से अधिक विशेषज्ञों की टीम ने करीब 14 घंटे में इस जटिल सर्जरी को पूरा किया।
डॉ. बिस्वास ने कहा कि यह सफलता गैस्ट्रो सर्जरी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एनेस्थीसियोलॉजी, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री और ट्रांसफ्यूजन टीमों के समन्वित प्रयास से संभव हो सकी। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय, वरिष्ठ अधिकारियों और एम्स प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया।
एम्स भुवनेश्वर ने ट्रांसप्लांट सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक विशेष ट्रांसप्लांट आईसीयू और अलग ऑपरेशन थिएटर भी तैयार किया है। यह सुविधा आयुष्मान भारत योजना के तहत भी उपलब्ध है, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
अब एम्स भुवनेश्वर का लक्ष्य ओडिशा और आसपास के राज्यों के मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध कराना है। यह उपलब्धि राज्य में उन्नत लिवर उपचार सेवाओं की शुरुआत मानी जा रही है।
