साल 2025 भारत के लिए टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में निर्णायक साबित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G नेटवर्क, सेमीकंडक्टर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में भारत ने तेज़ प्रगति दर्ज की। डिजिटल इंडिया के दूसरे दशक में कदम रखते हुए, टेक्नोलॉजी भारत की आर्थिक वृद्धि, गवर्नेंस और वैश्विक पहचान का मजबूत आधार बनकर उभरी।
AI मिशन ने पकड़ी रफ्तार
2025 में केंद्र सरकार के IndiaAI Mission ने रफ्तार पकड़ी। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के नेतृत्व में AI रिसर्च, इनोवेशन, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल डेवलपमेंट पर विशेष जोर दिया गया।
सरकार ने AI स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री–अकादमिक पार्टनरशिप, डेटा प्लेटफॉर्म्स और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को बढ़ावा दिया।
हेल्थकेयर, एजुकेशन, एग्रीकल्चर और गवर्नेंस में AI-आधारित सॉल्यूशंस के इस्तेमाल से सर्विस डिलीवरी में सुधार, निर्णय प्रक्रिया में तेज़ी तथा लागत में उल्लेखनीय कमी देखने को मिली।
IIT बॉम्बे में विकसित BharatGen जैसे जनरेटिव AI मॉडल ने भारतीय भाषाओं में AI विकास को नई दिशा दी। चार टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब्स को Technology Translation Research Parks (TTRPs) में अपग्रेड किया गया, जिससे रिसर्च, इंडस्ट्री और स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच मजबूत सेतु बना।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि AI विकास के साथ Responsible AI, डेटा सेफ्टी और एथिक्स को नीति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाएगा।
5G नेटवर्क का देशभर में विस्तार
साल 2025 में भारत में 5G नेटवर्क का विस्तार तेज़ रहा। DoT के अनुसार, 5G सेवाएं देश के अधिकांश शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुंच गईं। 5G टेक्नोलॉजी ने स्मार्ट सिटी, इंडस्ट्री ऑटोमेशन, टेलीमेडिसिन और रिमोट एजुकेशन जैसे क्षेत्रों को नई मजबूती दी।
सरकार और निजी टेलीकॉम कंपनियों ने मिलकर 5G यूज-केस डेवलपमेंट पर काम किया, जिससे डिजिटल इकोनॉमी को नई दिशा मिली और Industry 4.0 को बल मिला। 5G के विस्तार के साथ ही सरकार 6G की दिशा में भी तेज़ी से कार्यरत रही।
अंतरिक्ष में भारत की उड़ान और मजबूत हुई
साल 2025 भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और निर्णायक वर्ष के रूप में दर्ज हुआ। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने तकनीकी क्षमता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कमर्शियल लॉन्च के जरिए भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत किया। अंतरिक्ष क्षेत्र अब भारत की वैज्ञानिक उपलब्धि के साथ-साथ आर्थिक और रणनीतिक शक्ति का भी अहम आधार बन गया है।
2025 में ISRO ने PSLV, LVM3 और SSLV के माध्यम से कई सफल उपग्रह प्रक्षेपण किए। अमेरिका का भारी कमर्शियल सैटेलाइट BlueBird-6 भारत से लॉन्च होना भारत-अमेरिका स्पेस सहयोग का बड़ा उदाहरण रहा। इसके साथ ही CMS-03 जैसे संचार उपग्रहों ने डिजिटल कनेक्टिविटी और ब्रॉडकास्ट सेवाओं को मजबूती दी।
भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारियों ने इस वर्ष नई गति पकड़ी। क्रू मॉड्यूल, एस्केप सिस्टम और सुरक्षा से जुड़े अहम परीक्षण सफल रहे, जिससे भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान लक्ष्य के और करीब पहुंचने का संकेत मिला।
नेविगेशन, अर्थ ऑब्ज़र्वेशन और आपदा प्रबंधन में सैटेलाइट डेटा का उपयोग बढ़ा। साथ ही IN-SPACe के जरिए निजी स्पेस स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिला। 2025 ने स्पष्ट कर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत अंतरिक्ष तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बना वैश्विक मॉडल
आधार, UPI, डिजिलॉकर, UMANG और ONDC जैसे प्लेटफॉर्म्स ने भारत को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का वैश्विक लीडर बना दिया।
नवंबर 2025 में UPI के जरिए 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए। इनसे कैशलेस इकोनॉमी को नया आयाम मिला। इसके अतिरिक्त, ONDC जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से ई-कॉमर्स में लोकल बिजनेस की भागीदारी बढ़ी।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
2025 में भारत ने सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को लेकर बड़े कदम उठाए। सरकार के Semicon India Programme के तहत कई ग्लोबल और घरेलू कंपनियों ने भारत में चिप मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग यूनिट्स स्थापित करने की दिशा में प्रगति की।
सरकारी और निजी निवेश को मिलाकर ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत/घोषित की गईं, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में वृद्धि हुई, आयात पर निर्भरता कम हुई और ‘मेक इन इंडिया’ को टेक सेक्टर में नई मजबूती मिली।
स्टार्टअप इकोसिस्टम में टेक का दबदबा
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम 2025 में टेक्नोलॉजी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर मजबूत बना रहा। देश में 1.59 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, जिससे भारत दुनिया के शीर्ष तीन स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल हो चुका है।
इन स्टार्टअप्स ने अब तक 16.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं। रोजगार सृजन में फिनटेक, हेल्थटेक, एग्रीटेक, डीपटेक और डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित स्टार्टअप्स की भूमिका प्रमुख रही, जिसने टेक्नोलॉजी को आर्थिक विकास का अहम इंजन बना दिया।
आंकड़ों के अनुसार, लगभग 48 प्रतिशत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक शामिल है, जो टेक-आधारित उद्यमिता में बढ़ती महिला भागीदारी को दर्शाता है। इसके साथ ही, 50 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप्स गैर-मेट्रो और छोटे शहरों से संचालित हो रहे हैं, जिससे डिजिटल इनक्लूजन और क्षेत्रीय संतुलन को बढ़ावा मिला है।
साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन पर फोकस
डिजिटल विस्तार के साथ साइबर सिक्योरिटी 2025 में सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रही। साइबर फ्रॉड, डेटा चोरी और डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए नियमों को और सख्त किया गया। इसके अतिरिक्त DPDP नियम 2025 लाया गया जिससे व्यक्तिगत डेटा के प्रबंधन, गोपनीयता अधिकारों को मज़बूत करने और संगठनात्मक जवाबदेही लागू करने के लिये एक स्पष्ट, नागरिक-केंद्रित प्रणाली का निर्माण किया जा सके
टेलीकॉम विभाग (DoT) ने Telecommunication Cyber Security (TCS) Rules में संशोधन कर साइबर फ्रॉड, फर्जी मोबाइल लिंकिंग और डिजिटल अपराधों से निपटने के उपायों को मजबूत किया।
सरकार ने सुरक्षित, भरोसेमंद और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम के निर्माण के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित निगरानी और वैलिडेशन सिस्टम अपनाने पर जोर दिया।
टेक्नोलॉजी और गवर्नेंस का मजबूत तालमेल
2025 में ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म्स के जरिए सरकारी सेवाओं की पहुंच और पारदर्शिता बढ़ी। डिजिटल माध्यमों से नागरिक सेवाएं, सब्सिडी वितरण और शिकायत निवारण अधिक प्रभावी हुए। टेक्नोलॉजी ने सरकार और नागरिकों के बीच की दूरी को कम करने में अहम भूमिका निभाई।
क्लाइमेट टेक और क्लीन एनर्जी में टेक्नोलॉजी की भूमिका
2025 में टेक्नोलॉजी का उपयोग क्लाइमेट एक्शन और सस्टेनेबल ग्रोथ के लिए तेज़ हुआ। कोयला गैसीफिकेशन, मेथनॉल और DME से जुड़े पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए। सीमेंट सेक्टर में Carbon Capture and Utilisation (CCU) के पांच टेस्टबेड स्थापित हुए। ग्रीन हाइड्रोजन, बायोएनर्जी और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी भारत की क्लाइमेट कमिटमेंट्स का अहम हिस्सा बनीं।
वैश्विक इनोवेशन रैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
भारत ने Global Innovation Index 2025 में 38वां स्थान हासिल किया। WIPO के अनुसार, भारत IP फाइलिंग में दुनिया में 6वें स्थान पर रहा।
FAIR Project, CERN, SKA और Elettra जैसे अंतरराष्ट्रीय मेगा-साइंस प्रोजेक्ट्स में भारत की भागीदारी बढ़ी। Indo-French Green Hydrogen Partnership और अन्य STI समझौतों से वैश्विक सहयोग मजबूत हुआ।
रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
FIST, PURSE और SATHI योजनाओं के तहत सैकड़ों यूनिवर्सिटीज़ और PG कॉलेजों में रिसर्च सुविधाएं विकसित की गईं। IIT हैदराबाद में भारत का पहला in-situ microscopy centre (CISCoM) स्थापित हुआ, जिससे एडवांस्ड रिसर्च को नई गति मिली।
जुलाई 2025 में ₹1 लाख करोड़ की RDI Scheme को मंजूरी दी गई, जिससे प्राइवेट सेक्टर को डीप-टेक इनोवेशन में प्रोत्साहन मिला। फिनटेक, हेल्थटेक, एग्रीटेक और डीपटेक स्टार्टअप्स ने रोजगार और निर्यात में अहम योगदान दिया।
साल 2025 की ये उपलब्धियाँ केवल आंकड़ों या इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार मात्र नहीं हैं, बल्कि यह भारत के सांस्कृतिक और मानसिक बदलाव (Cultural Shift) का प्रतिबिंब भी हैं। दशकों तक भारत को तकनीक के ‘उपभोक्ता’ (Consumer) के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज भारत ग्लोबल ‘टेक लीडर’ के रूप में उभर चुका है।
यह प्रगति इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल दूसरों के बनाए रास्तों पर नहीं चलता, बल्कि ‘डिजिटल पब्लिक गुड्स’ और ‘स्वदेशी AI’ के माध्यम से दुनिया के लिए नए मानक स्थापित कर रहा है। सेमीकंडक्टर मिशन से लेकर गगनयान की सफलता तक, हर कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के उस संकल्प को पुख्ता करता है जहाँ तकनीक केवल आर्थिक विकास का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान और संप्रभुता का आधार है।
“इन सभी तकनीकी उपलब्धियों के साथ, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत अब तकनीक का ग्लोबल लीडर बन रहा है। 2025 का यह आत्मनिर्भर भारत अपनी चुनौतियों को खुद सुलझा रहा है और ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ रहा है।”