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आगरा -दूर देशों से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर आगरा की कीठम झील पहुंचे सैलानी परिंदे

Date : 01-Dec-2025

आगरा,30 नवंबर।

आगरा के रामसर वेटलेंड साइट सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम झील )में सर्दी का मौसम शुरू होते ही विदेशी प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है। पश्चिमी देशों में पाए जाने वाली पेलिकन भी यहां पहुंचना शुरू हो गए हैं, ये प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर दूर उड़कर आगरा की कीठम झील में आते हैं। यह इनकी मनपसंद जगहों में से एक है। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर कीठम झील पर पहुंच रहे प्रवासी पक्षियों के कलरव को सुनने और उनकी अठ खेलियों को निहारने के लिए सैकड़ो की संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक कीठम झील आ रहे हैं। देशी परिंदे भी नैसर्गिक सुंदरता का आनंद ले रहे हैं।

कीठम झील सूर सरोवर बर्ड सेंचुरी के रेंजर अंकित यादव ने बताया कि कीठम झील पहुंच रहे बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए, बाहर से आने वाले सभी प्रवासी पक्षियों की मॉनिटरिंग के साथ सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। सैलानी पक्षियों को कोई नुकसान न पहुंचाएं इसके लिए वन रक्षकों के रूटीन गश्त में इजाफा किया गया है।

आगरा का सूर सरोवर पक्षी विहार एक रामसर स्थल



आगरा के कीठम झील सूर सरोवर पक्षी विहार सहित उत्तर प्रदेश में कुल 10 रामसर स्थल घोषित किए गए हैं जो कि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ जैव विविधता को भी बनाए रखे हैं।

पर्यावरण की दृष्टि से इन स्थलों को रामसर स्थल का दर्जा दिया गया है, जिससे लोगों की इन स्थलों के प्रति जिम्मेदारी बनी रहे और ये संक्षरित रहें।

क्या होते हैं रामसर स्थल

रामसर स्थल रामसर संधि के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की एक वेटलेंड (आद्रभूमि) होती है। इन्हें साल 1971 में ईरान के शहर रामसर में यूनेस्को द्वारा आयोजित पर्यावरण संधि कंवेशन के के आधार पर रामसर वेटलेंड साइट के रूप में पहचान मिली हुई है। रामसर स्थल की मान्यता उन आद्रभूमियों को दी जाती है, जो जल पक्षियों की बहुत सी प्रजातियों को आवास प्रदान करती है।

कीठम झील 1991 से वन्यजीव अभयारण्य घोषित

आगरा का सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य, कीठम झील के नाम से ज़्यादा जाना जाता है, क्योंकि यह झील और आसपास का क्षेत्र मिलकर इस अभयारण्य का निर्माण करते हैं। जलपक्षियों के लिए एक आश्रय स्थल, कीठम झील को 1991 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था। यह झील प्रवासी और स्थानीय जलपक्षियों की 126 से ज़्यादा प्रजातियों का घर है।

प्रारंभ में यह अभ्यारण्य 4.03 वर्ग किलोमीटर के मामूली क्षेत्र में फैला था, बाद में वन विभाग ने जंगली जानवरों के लिए हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए झील के चारों ओर पेड़ लगाकर अभयारण्य क्षेत्र को 8 वर्ग किलोमीटर तक विस्तारित कर दिया।

कीठम झील तक पर्यटकों का पहुंचना आसान

सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य दिल्ली-आगरा मुख्य राजमार्ग पर रनकता गाँव के नजदीक सुविधाजनक रूप से स्थित है। इसमें मुख्य मार्ग से कुछ दूरी तक कारों को अंदर जाने की अनुमति है इसके बाद पैदल चलने की ही अनुमति है। पैदल मार्ग के किनारे जंगल बसे हैं, और अंदर जाने के लिए कई छोटे रास्ते हैं। यहाँ, पत्तों की सरसराहट, जंगली जानवरों की धीमी आवाज़ें और कभी-कभी साँपों की फुफकार भी सुनी जा सकती है। जंगल में हॉग डियर, स्पॉटेड डियर, नीलगाय और मॉनिटर लिज़र्ड आसानी से देखे जा सकते हैं।

कहां-कहां से कीठम पहुंचते हैं प्रवासी पक्षी

तापमान में गिरावट आने के साथ प्रवासी पक्षियों के समूह कीठम पहुंचना शुरू हो गये है इनकी संख्या आगामी दिनों में ठंड बढ़ने के साथ-साथ लगातार बढ़ती जाएगी, पक्षी अपनी मंजिल कीठम पहुंचकर खूब कलरव कर रहे हैं।ये प्रवासी पक्षी सेंट्रल एशियन फ्लाई वे से रूस, यूक्रेन, चीन, मंगोलिया, साइबेरिया समेत अन्य देशों से भारत आएं हैं।

पहुंचने वाले प्रवासी परिंदो की प्रजातियाँ

सूर सरोवर पक्षी विहार के रेंज ऑफिसर अंकित यादव ने बताया कि

जिसमें बार-हेडेड गूज, नोर्दन पिनटेल, काॅमन टील, संकटग्रस्त प्रजातियों में सारस क्रेन, काॅमन पोचार्ड, ब्लैक-नेक्ड स्टार्क, ग्रेट कोर्मोरेन्ट, पाइड एवोसेट, नोर्दन शोवलर समेत अन्य पक्षी खूब दिख रहे हैं.

यहाँ हर साल बढ़ रहा है प्रवासी पक्षियों का आगमन

अंकित यादव ने बताया कि रामसर साइट सूर सरोवर पक्षी विहार में एशियन वाटरबर्ड सेंसस( पक्षियों की गणना ) 2025 की गणना में 3839 वाटर बर्ड चिन्हित किए गए हैं, जो बीते साल 2024 की तुलना में 1509 पक्षी अधिक हैं। इस वर्ष 2025 में माह नवंबर से मार्च 2026 तक आने वाले प्रवासी परिंदों की गणना अगले वर्ष होगी।

सूर सरोवर में मेंटेन वॉटर लेवल पक्षियों के लिए अनुकूल

अंकित यादव ने पक्षी विहार में व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए बताया कि झील में वाटर के लेवल को मेंटेन किया है जिससे यहां पर आए प्रवासी पक्षियों के लिए स्वस्थ वातावरण तैयार होता है। झील में टापू भी भी उभर आए हैं। इसके साथ ही यहां पर आने वाले पक्षियों के लिए भरपूर मात्रा में भोजन है। जिसकी वजह से ही यहां पर प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों की संख्या में वृद्धि हुई है। झील में इस समय टापू उभर कर नजर आ रहे हैं जिन पर प्रकृतिक जीव जंतु विचरण करते रहते हैं। दिन के समय पक्षी इन्ही टापुओं को बैठते हैं और पानी में मछलियों का शिकार करते हैं । झील का पानी साफ है जिसमें स्वस्थ मछलियां इन पक्षियों के लिए उपलब्ध रहती हैं।

कीठम पहुंच का प्रवास करने वाले पक्षियों के आगमन, उनकी संख्या, प्रजाति, आदि विषयों पर मॉनिटरिंग करने के लिए हम लोग चंबल सेंचुरी तथा स्थानीय पक्षी विशेषज्ञों से राय मशवरा लेते रहते हैं रामसर साइट सूर सरोवर पक्षी विहार में अभी तक प्रमुख रूप से

इस साल रोजी पेलिकन, डालमेशन पेलिकन,पेंटेड स्टॉक, डार्टर, नर्थन सोबलर, विश्लिंग टील, कॉम डक, पलाश गुल्स, ब्लैक-नेक स्टॉक ग्रे हॉर्न, सारस क्रेन, बार-हेडेड गूज जैसे मेहमान पहुंच चुके हैं। दूसरे विदेशी पक्षियों का भी इंतजार किया जा रहा है।इनमे से संकटग्रस्त पक्षियों की कुछ प्रजातियां भी नजर आईं, जिनमें डालमेशन पेलिकन, रिवर टर्न, पेंटेड स्टार्क, ब्लैक हेडेड आईबिश, ब्लैक-टेल्ड गोडविट, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, शामिल हैं सबसे अधिक संख्या में नोर्दन पिनटेल, बार-हेडेड गूज, ग्रेट कोमोरेंट, परिंदे प्रीतम झील पहुंचे हैं।पाइड एवोसेट, नोर्दन शोवलर, लिटिल कोरिन्ट, कॉमन टील अभी तक अपेक्षाकृत कम संख्या में देखे गए हैं


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