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देश में सबसे पहले महाकालेश्वर मंदिर में मना रक्षाबंधन, बाबा महाकाल को अर्पित की गई पहली राखी

Date : 09-Aug-2025

 सवा लाख लड्डुओं का लगा महाभोग

 
उज्जैन, 9 अगस्त। देशभर में आज (शनिवार) रक्षाबंधन का त्यौहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। परम्परा के मुताबिक, देश में सबसे पहले मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन मनाया गया। यहां शनिवार तड़के भस्म आरती के पश्चात पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को पहली राखी अर्पित की गई। इस दौरान पुजारी परिवार द्वारा भगवान माकाल को बेसन के सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया गया।
 
गौरतलब है कि देश में सभी त्यौहारों सबसे पहले महाकालेश्वर मंदिर में मनाए जाने की परम्परा है। रक्षाबंधन पर शनिवार को तड़के तीन बजे भस्म आरती के लिए मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। भस्म आरती के दौरान अमर पुजारी के परिवार की महिलाओं द्वारा तैयार की गई राखी भगवान महाकाल अर्पित की गई। इसके साथ देशभर में रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत हो गई है। भगवान महाकाल को राखी बांधने के बाद भस्मआरती के दौरान ही सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। इस महाभोग की तैयारी पिछले चार दिनों से चल रही थी।
 
इस बार जो राखी भगवान महाकाल को अर्पित की गई, उसमें मखमल का कपड़ा, रेशमी धागा और मोती का उपयोग किया गया है। राखी पर भगवान गणेश को विराजित किया है। यह एक वैदिक राखी है, जोकि शास्त्रों में बड़ा महत्व रखती है। इसमें लौंग, इलायची, तुलसी के पत्ते और बिल्ब पत्र जड़े रहते हैं। इसे अभिमंत्रित किया जाता है। यह राखी बांधकर पुजारी परिवार द्वारा देश और विश्व के कल्याण की मनोकामना की गई।
 
मंदिर प्रबंधन के मुताबिक, महाकाल मंदिर के पुजारी परिवार द्वारा हर वर्ष भगवान के लिए राखी अपने हाथों से तैयार की जाती है। इस बार राखी में मखमल का कपड़ा, मोतियों की लड़ों और रेशमी धागे का उपयोग करके आकर्षक- परंपरागत राखी का निर्माण किया गया है। राखी के केंद्र में भगवान गणेश विराजीत हैं। इस बार पं. अमर पुजारी के परिवार द्वारा भगवान के चरणों में बेसन, शुद्ध घी और सूखे मेवे से निर्मित सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया गया।
 
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि महाकाल को राखी बांधने की यह परंपरा सदियों पुरानी है। जिन बहनों के भाई नहीं होते, वे महाकाल को अपना भाई मानकर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं, इसलिए इस दिन मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ता है। यहां देशभर से आने वाले श्रद्धालु भगवान महाकाल के चरणों में राखी अर्पित करते हैं।

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