श्रीलंका हाल के वर्षों की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। आपदा प्रबंधन केंद्र के अनुसार चक्रवात दित्वा से मरने वालों की संख्या बढ़कर 334 हो गई है, जबकि 370 लोग अब भी लापता हैं। व्यापक बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई जिलों का आपसी संपर्क पूरी तरह टूट चुका है।
भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत बचाव अभियान तेज कर दिया है। सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर और एनडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है। कल कई फंसे हुए यात्रियों को हवाई मार्ग से भारत वापस लाया गया।
राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए आश्वासन दिया कि आपातकालीन स्थिति का उपयोग राहत और पुनर्वास प्रयासों को गति देने के लिए किया जाएगा। इसी बीच, श्रीलंका और भारत की सेनाएँ बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चला रही हैं—जिसमें माविल अरु टैंक के पास से 211 लोगों को एयरलिफ्ट करना और कोटमाले सहित अन्य क्षेत्रों में गहन बचाव कार्य शामिल हैं।
आकाशवाणी संवाददाता के अनुसार, उफनती नदियाँ और अस्थिर ढलानें बचाव दलों के लिए गंभीर खतरे पैदा कर रही हैं। भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर लगातार उड़ान भर रहे हैं, घायलों को अस्पताल पहुँचा रहे हैं और अलग-थलग पड़े समुदायों तक जरूरी सामग्री पहुँचाई जा रही है।
पुट्टलम और बादुल्ला में एनडीआरएफ की टीमें जलमग्न क्षेत्रों में पैदल ट्रैकिंग कर फंसे परिवारों तक पहुँचने का प्रयास कर रही हैं। इसी बीच, स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी दी है कि लगातार वर्षा और बढ़ते जलस्तर से नए भूस्खलनों का खतरा और बढ़ सकता है।
आपातकालीन आश्रय स्थलों में भीड़ बढ़ रही है, और स्वयंसेवक भोजन, दवाइयाँ और स्वच्छ पानी वितरित कर रहे हैं। सरकार के अनुसार अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों का पता लगाना और कटे हुए क्षेत्रों से संपर्क बहाल करना है।
