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अमेरिका ईसाइयों की सुरक्षा के लिए नाइजीरिया पर प्रतिबंध लगा सकता है

Date : 21-Nov-2025

वाशिंगटन/लागोस, 21 नवंबर । अमेरिका ईसाई समुदायों और धार्मिक स्वतंत्रता ' सुनिश्चित' करने के लिए नाइजीरिया सरकार पर दबाव डालने के तहत प्रतिबंधों के साथ- साथ 'युद्ध विभाग' के आतंकवाद निराेधक कार्यक्रमाें की मदद ले सकता है।

अमेरिकी विदेश विभाग के अफ्रीकी मामलों के ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी जोनाथन प्रैट ने गुरुवार को प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के समक्ष यह खुलासा कियाा।

उन्हाेंने कहा कि ट्रंप प्रशासन नाइजीरिया में ईसाइयों पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए एक व्यापक योजना तैयार कर रहा है, जिसमें राज्य और वित्त विभाग के माध्यम से प्रतिबंध लगाना, पेंटागन (जिसे ट्रंप ने ‘डिपार्टमेंट ऑफ वॉर’ नाम दिया है)के आतंकवादी निराेधी कार्यक्रम और अन्य प्रयास शामिल हैं।

प्रैट ने कहा, “यह योजना नाइजीरिया सरकार को प्रोत्साहित करने और मजबूर करने के लिए है ताकि ईसाई समुदायों की बेहतर सुरक्षा हो और धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार आए।”

नाइजीरिया, अफ्रीका का सबसे अधिक आबादी वाला शीर्ष तेल उत्पादक है जहां ईसाई और मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव लंबे समय से चला आ रहा है। देश के मध्य क्षेत्र में विवादों के कारण 'फुलानी' चरवाहों पर हमले बढ़े हैं, जिसमें सैकड़ों ईसाई किसानों की हत्या हुई है। चरमपंथी इस्लामिक समूह बोको हराम ने भी उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया में 15 वर्षों में दसियों हज़ार लोगों काे माैत के घाट उतारा है।

ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अगर नाइजीरिया ईसाइयों की हत्याओं पर कार्रवाई नहीं करता तो वह ‘त्वरित’ सैन्य कार्रवाई की तैयारी करेंगे और सभी सहायता तुरंत रोक देंगे।

इस बीच एक नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडाउ और पेंटागन अधिकारियों से मिलने वाला है।

हालांकि नाइजीरिया सरकार का कहना है कि ईसाइयों पर उत्पीड़न के दावे जटिल सुरक्षा स्थिति को गलत तरीके से पेश करते हैं और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के उनके प्रयासों को नजरअंदाज करते हैं। देश में 200 से अधिक जातीय समूह ईसाई, इस्लाम और पारंपरिक धर्मों का पालन करते हैं, जहां शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का लंबा इतिहास है। सरकार के मुताबिक संसाधनों पर विवाद या जातीय विभाजन से हिंसा भड़कती रहती है।

उधर अमेरिकी सांसदों ने नाइजीरिया पर दबाव बढ़ाने की मांग की है।


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