मैथ्री मूवी मेकर्स के रविशंकर ने हाल ही में अपनी फिल्म 'आंध्र किंग तालुका' को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म इंडस्ट्री में बड़े सितारों की फीस पर सवालों का जवाब दिया। एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि क्या बड़े स्टार्स मेकर्स पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को समझते हैं।
रविशंकर ने बताया कि उनके अनुभव में कई साउथ स्टार्स इस मामले में बेहद सहानुभूतिपूर्ण रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा:
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राम चरण को 'रंगस्थलम' (2018) के लिए ₹4 करोड़ की फीस थी, जिसे उन्होंने दो साल में किश्तों में लिया।
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महेश बाबू ने 'सरकारु वारी पाटा' (2022) की रिलीज़ के एक साल बाद अपनी फीस ली।
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चिरंजीवी और रवि तेजा ने 'वाल्टेयर वीरय्या' (2023) के लिए फीस को ओटीटी सौदों के हिसाब से समायोजित किया और देरी से भुगतान के लिए कोई ब्याज नहीं लिया।
रविशंकर ने यह भी बताया कि उपेंद्र ने 'आंध्र किंग तालुका' साइन करते समय जो फीस ऑफर की गई, वह स्वीकार कर ली, जबकि राम चरण ने कोई अग्रिम राशि नहीं ली और उन्हें मुनाफे के हिस्से की पेशकश की गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्टार्स की फीस पर अक्सर बनाई जाने वाली आलोचना अनुचित है और अधिकांश बड़े सितारे फिल्ममेकर्स की स्थिति को समझते हैं।
